वर्ष 2000 से इस्राईल ने बहुत से फ़िलिस्तीनी कार्यकर्ताओं को क़त्ल कर दिया जो राजनैतिक कार्यकर्ता थे जबकि ईरान के लगभग 12 वैज्ञानिक क़त्ल किए गए जिनकी हत्या में इस्राईल का हाथ था।
यह जो नेतनयाहू तेहरान में प्रोफ़ेसर फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के बाद ज़हरीली मुस्कान मुस्कुरा रहे हैं और कह रहे हैं कि बीता हफ़्ता बड़ी कामयाबियों का हफ़्ता था उससे यही लगता है कि इस्राईल अपने लिए हर कृत्य को जायज़ मानता है।
लेखक का कहना है कि इस्राईली मंत्री रहबआम ज़ईफ़ी के हत्यारे तो इस्राईली जेलों में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं जबकि फ़िलिस्तीनी नेताओं अबू जेहाद और साबित साबित के हत्यारे इस्राईली सरकारों में मंत्री पद पर बैठे हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अपने वैज्ञानिक की हत्या का इंतेक़ाम तो ज़रूर लेगा लेकिन इस वैज्ञानिक की हत्या से ईरान का परमाणु कार्यक्रम हरगिज़ बाधित होने वाला नहीं है।
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि परमाणु वैज्ञानिक फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में इस्राईल लिप्त है। ईरान की संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने कहा कि साक्ष्य और जानकारियां मिली हैं जिनसे साबित होता है कि इस हत्या में इस्राईल का हाथ है और आरंभिक जांच में संदेह की सूई इस्राईल पर केन्द्रित है।
ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था का कहना है कि देश के वैज्ञानिक पूरी शक्ति से परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाते रहेंगे।
स्रोतः अलजज़ीरा+इस्राईली मीडिया